रिटायर्ड अफसर पर अपशब्दों के बयान पर विधायक माफी मांगे : देवासी


बालोतरा। यह एक कठोर हक़ीक़त है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी को बचाए रखने वाले हर क़ानून के अपनी जगह पर होने के बावजूद समाज ने बिना प्रतिरोध के आत्मसमर्पण कर दिया है।अब हमें बाल की खाल निकालना बंद कर देना चाहिए. हम आज के भारत में जो देख रहे हैं वह सैद्धांतिक कसौटी पर फासीवाद है या नहीं, इसकी बारीकियों में पड़ने का कोई मतलब नहीं है।

पंचायती राज चुनावों में हार की कगार पर विधायकों ने रिटायर्ड अधिकारियों पर आरोप लगाने शुरू कर दिए। दो दिन पूर्व सिवाना विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए सिवाना विधायक का एक वीडियो वायरल हुआ। जिसमें विधायक ने सेवानिवृत्त आरपीएस अधिकारी भंवरलाल देवासी को अपशब्द कहे। विधायक ने देवासी को कहा आप बिलाड़ा के हो और सिवाना में चुनाव लड रहे हो। उन्होंने कहा कि “ अटे थोरे बाप ने रोवा ने चुनाव लड़ो” जैसे अभद्र भाषा का प्रयोग किया। भाजपा विधायक के इन अपशब्दों का विरोध करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता विरमदेव देवासी कहा कि देवासी समाज विधानसभा चुनाव 2023 में वोट की चोट से प्रहार करेगी।

हकीकत में विरोध की आवाजों को ही नहीं दबाया जा रहा है. यहां तक कि तथ्यों पर भी पाबंदी लगाई जा रही है, जिसका मतलब यह है कि सिर्फ कानों में मधुर रस घोलने वाले झूठों को ही इजाजत दी जाएगी।

बालोतरा से सामाजिक कार्यकर्ता विरमदेव देवासी ने विधायक पर जमकर हमला बोला। देवासी ने कहा कि एक सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते मेरे साथियों और बंधुओं से आग्रह करूंगा कि मैंने सच्चाई का प्रकाशन करते वक्त धमकियों के आगे डर और घबराहट का अनुभव किया है। लेकिन आप मेरी बातों पर मत जाइए। आप पिछले साल सिवान विधानसभा चुनाव के दौरान हुए एक गरीब परिवार पर हमलें के बारे गहराइयों से ढूंढ कर मंथन करना चाहिए। उस पर विचाररूपी धारा के तहत समाज के धागे से जुड़ कर रहें और आने वाले चुनावों में सिवाना विधानसभा से भाजपा को वोट की ताकत हरायेगें। यह राजनीति और नेता हमें गुलाम बनाना चाहते हैं। रिटायर्ड अधिकारी ने पिछड़ रही समाज को जागरूक करने के लिए जब आवाज उठाई तो राजनेताओं को लगा कि अब हमारा सामंतवाद ख़त्म होने वाला है और उन्होंने अधिकारी के अपशब्दों का प्रयोग करते हुए भ्रष्टाचार का आरोपी लगाया।

पहली बात तो यह अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर है, जो उनके अपने चरित्र के बिल्कुल उलट है। दूसरी बात, यह एक नेता के मुंह से अशोभनीय है, जो कि एक अपनी राजनीति के गलियारों में गुलाम बनाना चाहते हैं उस नेता के लिए बिल्कुल अजनबी चीज है। अपनी समाज के अलावा किसी अन्य दृष्टिकोण को रखने की कोई इजाजत ही नहीं है।

अभिव्यक्ति की आजादी पर किसी सम्माननीय व्यक्ति को अपशब्द कह कितना विडंबनापूर्ण है, विधायक इस पर माफी मांगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed