पशुपालक समाज को सुरक्षा प्रदान व आर्थिक सहायता दें सरकार


रिपोर्ट- विरमदेव देवासी

हालात कैसे भी हो समझोता नही करते उन हालातो से लड़ते हैं।
अपने पशुधन के लिए घर से दूर जंगलो में रहते हैं।
इनके लिए तो जंगली जानवर का भय होता ही है उससे भी ज्यादा ख़य्याल इन्हें अपने धन का रखना होता हैं।
बरसाती मौसम में सबसे ज्यादा तकलीफ़ चरवायों को होती हैं।
कहा किस मोड़ पर जंगली जानवर से सामना हो जाए और न जाने किस वक्त इंद्र महाराज मेहरबान हो जाए।
पर रबारी हमेशा अपनी मस्ती मे मस्त और हर हालत से लड़ने के लिए तैयार रहते है।

आजकल हम शहरो में बचने लगे है
कभी कभी शहरो में ट्राफ़िक जाम लग जाता हैं तो हम घण्टो तक लाइन में खड़े रहते है ।
पर जब भी यह शहर वाले गाव जाते है।
ओर कोई मवेशी अपने पशुधन को लेकर सड़क से गुजर रहा होता हैं तो वह बार बार हॉर्न बजाते हैं जैसे कि उन्हें कही सरहद पार जाना हो…
ओर उनके साथ बतमीजी पर भी उतर आते है।
मैं कभी भी गाव में होता हूँ
ओर मुझे कितना भी जरूरी काम क्यों न हो कही जाते वक्त अगर कोई देवासी अपनी भेड़बक़री लेकर सड़क पार कर रहा होता हैं तो में 5 मिनट रुक जाता हूँ ।
उस 5 मिनट मेरा कुछ नहीं कम होता पर
उसके बाद उस भाई के लिए हमारे मन मे जो सन्मान नजर आता है वह जैसे महादेव ने उनके द्वारा हमे आशिर्वाद दिया हो..
मुझसे जुड़े ओर मेरे अपनो से एक विनती करना चाहूंगा कि कही पर भी सड़क से कोई मवेशी को गुजरते देखे तो 2 मिंट बिना हॉर्न बजाए रुक जाइए ।फिर देखिए वो 2 मिंट आपके पूरे दिन का काम घण्टो में कर देगा।

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