दबी हुई आवाज: विकास को तरसता विमुक्त घुमन्तु समुदाय!


पूनाराम सांसी

विमुक्त घुमंतु समुदाय वह तबका है जो स्थायित्व और विकास से आज भी वंचित है। विमुक्त घुमंतु अर्ध्दघुमंतु समुदायों में अनेकों जातियों का यह विशाल समुदाय आजादी के सात दशक बाद भी यह बहुत ही दयनीय अवस्था में है। indian nomadic races.

देश में इतना बडा बाहुल्य शैक्षिणिक रुप से अत्यंत पिछड़ा हुआ है जिसके लिए अब तक कोई विशेष प्रयास सरकारों द्वारा नहीं किये गये है। शिक्षा के आभाव के कारण ये समुदाय बैरोजगारी, सामाजिक कुरुतियों का भी शिकार रहे है। सदियों से घुमंतु जीवन शैली में जीवन जिने वाले इस समुदाय का एक बडा हिसा कच्ची बस्तियों में बसा हुआ है। तो दुसरा हिस्सा आज भी कबायली तरिके से घुमकड जीवन जी रहा है। ghumantu jati

कच्ची बस्तियों में रहने वाला यह समुदाय अधिकांसतः विभिन्न आभावों से ग्रसित है। जिसमें सडक सिवरेज पानी स्कूल शमशान चिकित्सा आवास, बैरोजगारी, आदि समस्याओं से आज भी यह समुदाय झुझ रहा है। घुमकड जीवन जिने वाले परिवार आज भी स्थायित्व के लिए संघर्ष कर रहे है। इन समुदायों को यदि आज के परिदृश्य में समाज की मुख्यधारा से नहीं जोडा गया और इनके विकास के लिए बेहतर प्रयास नहीं किये गए तो आगामी वर्षों में ये समुदाय देश और प्रदेश की सरकारों के लिए बहुत घातक सिद्ध होगें। बैरोजगारी और शिक्षा आभाव के कारण यह समुदाय बहुत तेजी से अपराध की और जा रहे है। परंतु प्रशासनिक अधिकारियों और सरकारों का इस समुदाय के प्रति लचर रवैया बहुत बडे वर्ग संघर्ष को उत्पन्न करने वाला है। देश में बीस करोड़ आबादी वाला यह समुदाय विकास को तरस रहा है। ghumakkad jatiyan

इन समुदायों के लिए सरकारेंं विभिन्न योजनाओं को कागजों में ही चलाती है उन योजनाओं का कोई व्यापक असर इन समुदायों में नजर नहीं आता है। बहुत सी योजनाओं पर दिये जाने वाले बजट पर प्रशासनिक अधिकारी अपना कार्य जिम्मेदारी के साथ नहीं करते है। इस कारण हर वर्ष इन योजनाओं से बजट लेप्स हो जाता है। और कुछ योजनाओं में प्रशासनिक अधिकारी बेहतर कार्य करते है। तो सरकारी विभागों द्वारा बजट देने में व्यवधान डालकर विभिन्न समस्याएं उत्पन्न की जाती है। यही इन योजनाओं की विफलता का कारण है। विमुक्त घुमंतु समुदाय के विकास और उनके स्थायित्व के लिए आज एक व्यापक दृष्टिकोण से विचार करने का दायित्व केंद्र और राज्य सरकारों का है। इनके जीवन को बेहतर बनाने और इनके हुनर को दुनिया के सामने लाने का प्रयास सरकारों को करना चाहिए। घुमंतु समुदाय शारिरीक रुप से बलिष्ठ माना जाता है और उनके इस आनुवांशिक गुण को खेल कौशल में परिवर्तित किया जा सकता है। इसके लिये सरकारों को इस समुदाय के लिए एक विशेष खेल निति बनाई जानी चाहिए। जो इनके खैल कोशल को निखारने में मदद कर सके यदि एसा होता है। तो बहुत कम समय में इस समुदाय से अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी प्राप्त किये जा सकते है।

इन समुदायों के विधार्थियों का प्रारंभिक शिक्षा में पिछडने का मुख्य कारण इनकी क्षैत्रीय एवं हिंदी से अलग स्वयं की भाषा को भी कहा जा सकता है। जो इनके स्कूल के प्रारंभिक काल में बहुत बाधा पहुंचाती है। इस पर भी सरकारों को विशेष प्रयासों के साथ जागरूकता कार्यक्रमों को सचालित किया जाना चाहिए। और इन समुदायों के लिये विशेष स्कूलों का भी संचालन किया जाना चाहिए। इन समुदायों के कच्चे आवासों के लिए विशेष बजट घोषित किया जाना चाहिए। भूमिहीन परिवारों को उनकी आवश्यकता अनुसार बसाया जाये और उनकी आवश्कताओं के पूर्त्ति हेतु विशेष योजनाओं को कागजों के बजाय धरातल पर उतारा जाये तो यह विमुक्त घुमंतु समुदाय देश और प्रदेश के विकास का साझेदार बन सकता है। nomadic races india

विमुक्त घुमंतु समुदाय विभिन्न लोक कलाओं से भरा पडा है जिन्हें उचित प्रोत्साहन की आवश्यकता है आशा है की इस वंचित वर्ग को सरकारें अपराध में धकेलने के बजाय उनका पुनर्वास कर विकास की राह पर लायें।
पूनाराम सांसी
सामाजिक कार्यकर्ता

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