कौनसी दिशा में जा रहा है आज का युवा धन


बालोतरा/विरमदेव देवासी:- आजकल की पीढ़ी के कुछ युवा दिशाहीन होते जा रहे है। युवाओं के दुश्मन अफीम, डोडा, दारु, सिगरेट, चरस, गांजा और ड्रग्स जैसी चीज़ों ने नशे का आदी बना दिया है। आज की युवा पीढ़ी की मानसिकता को समझना आसान नहीं। आजकल के बच्चे विभिन्न शोख को पूरा करने की जल्दबाजी में है, कोई भी रास्ता इख़्तियार कर लेते है और अंत में परिणाम प्राप्त करने की दिशा में इतना मग्न हो जाते है कि किस दलदल में घंस रहे है उसका ज्ञात ही नहीं होता।
हम संस्कारों की बातें करते है कि अच्छे संस्कार देकर और पढ़ा लिखा कर बच्चों का सभ्य समाज के लिए घड़तर करते है। कौनसे माँ बाप एसे होंगे जो बच्चों को अच्छी बातें, अच्छे संस्कार नहीं देते।

करीब दो माह पहले पाथेडी प्रकरण, कुछ दिन पहले किटनोद में प्रेमी जोड़े ने आत्महत्या करने के साथ कई उदाहरण सामने है। क्या उम्र है दोनों की और कहाँ से कहाँ पहुँच गए। शहरी क्षेत्रों में देखा जाए तो बहुत ही विचारणीय विषय है। बच्चे क्या करते है, कहाँ जाते है, किससे मिलते है क्या ये सब माँ बाप को खबर नहीं रहती होंगी। या जानबूझकर नज़र अंदाज़ करते होंगे। पैसे कमाने का शोर्टकट चुनकर अपनी ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ कर लेते है बच्चें फिर भी माँ बाप की आँखें क्यूँ नहीं खुलती। या पैसों की चकाचौंध माँ बाप को भी भाती होंगी। या एक कारण ये भी रहता होगा की बच्चें उद्धत होते होंगे माँ बाप को कुछ समझते ही नहीं, सुनते ही नहीं होंगे और मनमानी पर उतर जाते होंगे। एशो आराम की ज़िंदगी की लालच में क्राइम के दलदल में फंस कर इज्ज़त और ज़िंदगी को दांव पर लगा लेते है। जवान बेटी घर छोड़ कर किसी लड़के के साथ रहती है बिना शादी के उस माँ बाप को रात को नींद कैसे आती होंगी। एक लड़की की पैसों की भूख और हाई फ़ाई लाइफ़ स्टाइल के चक्कर में एक घर का चिराग बुझ गया। सुशांत सिंह राजपूत जैसा सीधा और होनहार लड़का जान से हाथ धो बैठा।

आज ऐसे कई कारण हैं जो युवा पीढ़ी को अपराध करने के लिए प्रेरित करते हैं। जिसमें शिक्षा की कमी, बेरोजगारी, जल्दी पैसे कमाने की लालच, जीवन के प्रति असंतोष, बढ़ती प्रतिस्पर्धा। पर रिया और शोविक ना तो गरीब घर के है ना अनपढ़ शायद इनके मामले में पैसे की भूमिका अहम रही है।

आज का युवा संक्रमण काल से गुजर रहा है। वह अपने बलबूते पर आगे तो बढ़ना चाहता है, पर परिस्थितियाँ और समाज उसका साथ नहीं देते। चाहे वह राजनीति हो, फिल्म व मीडिया जगत हो, शिक्षा हो, उच्च नेतृत्व हो हर एक क्षेत्र में जलन, प्रतिस्पर्धा, रैगिंग, स्वार्थ और लालसा जैसी चीजों ने युवा हृदय को झकझोर दिया है। जब वह देखता है कि योग्यता और ईमानदारी से कार्य सम्भव नहीं तो कुण्ठाग्रस्त होकर गलत रास्तों पर चल पड़ता है। या अवसाद का भोग बनकर खुदखुशी का रास्ता अपनाता है या खुदखुशी करने के लिए किसी का दबाव बनाया जाता है।
पर यहाँ माता-पिता का यह कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को सही गलत का ज्ञान दे प्यार से ना समझे तो डांट फ़टकार से समझाए। आज की युवा पीढ़ी देश का सुनहरा भविष्य है । उन्हें सही प्रोत्साहन के साथ अपनी ज़िंदगी और देश की उन्नति को ऊचाँइओ पर ले जाना है इतनी समझ देनी होंगी।

मैं “विरमदेव देवासी किटनोद” समाज की वर्तमान दिशा एवं दशा देखकर विचार करता हूँ कि आखिर हम एवं हमारा समाज किस दिशा में अग्रसर होता जा रहा है। आज मित्र अपने मित्र से कपट करके सारी सम्पत्ति हथिया रहा है। संसार का सबसे पवित्र बंधन पति पत्नी का माना जाता है परंतु यह भी आज इस दुर्गुण से अछूता नहीं रह गया है। प्राय: देखने को मिल रहा है कि पत्नी ने पति की या पति ने पत्नी की छलपूर्वक हत्या करवा दी।

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